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Shiv Vishwakarma |
Hindi Now Uttar Pradesh • 16 Dec 2025, 01:03 pm
प्रदेश भाजपा संगठन में पिछड़ी जातियों से आने वाले नए ‘चौधरी’ को कमान सौंपकर जिस तरह विपक्ष के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समीकरण की काट का संकेत दिया गया है, अब उसी रणनीति को प्रदेश सरकार में भी उतारने की तैयारी शुरू हो गई है। कहा जा रहा है कि इसी रणनीति के तहत जल्द ही कैबिनेट विस्तार किया जाएगा। हालांकि मंत्रिमंडल विस्तार की तारीख और उसका अंतिम स्वरूप अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। सूत्रों के मुताबिक लखनऊ से लेकर दिल्ली तक इस बात पर गंभीर मंथन चल रहा है कि आगामी विस्तार के जरिए सरकार में भी पीडीए समीकरण को किस तरह संतुलित और मजबूत किया जाए।
पिछले एक साल से चल रही मंत्रीमंडल विस्तार की सुगबुगाहट
मंत्रिमंडल विस्तार की सुगबुगाहट पिछले वर्ष अक्टूबर में पार्टी के संगठन पर्व की शुरुआत के साथ ही शुरू हो गई थी, लेकिन तब से अब तक तस्वीर साफ नहीं हो सकी। अब जबकि संगठन पर्व का समापन हो चुका है और प्रदेश भाजपा को नया अध्यक्ष भी मिल गया है, तो योगी सरकार के दूसरे कार्यकाल की टीम में बदलाव की अटकलें फिर से तेज हो गई हैं। बदले हुए राजनीतिक माहौल में संभावित मंत्रिमंडल विस्तार का केंद्र बिंदु जातीय संतुलन को माना जा रहा है।
आगामी विधानसभा चुनाव में पीडीए को चुनौती देने की कोशिश
सूत्रों का कहना है कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में विपक्ष के पीडीए गठजोड़ को मजबूत चुनौती देने के लिए यह पूरी कवायद की जा रही है। मौजूदा मंत्रिमंडल में पिछड़ी और दलित जातियों के प्रतिनिधित्व को और प्रभावी बनाने की योजना पर विचार चल रहा है। खास तौर पर कुर्मी समाज समेत अन्य ओबीसी वर्गों के मंत्रियों की संख्या और कद बढ़ाया जा सकता है। इसके साथ ही कुछ मौजूदा चेहरों के स्थान पर ऊर्जावान और युवा विधायकों को मंत्रिमंडल में शामिल करने पर भी विचार हो रहा है, ताकि संगठन और सरकार दोनों में नई ऊर्जा का संचार हो सके।
हाल में कुर्मी समाज के टूटने से बीजेपी ने चली पीडीए चाल
पार्टी सूत्रों का मानना है कि हाल के दिनों में कुर्मी समाज का एक हिस्सा भाजपा से दूरी बनाता नजर आया है। ऐसे में इस वर्ग पर फिर से मजबूत पकड़ बनाने के लिए कुर्मी नेताओं को प्रमोट करने की रणनीति अपनाई जा सकती है। हालांकि पूरी तस्वीर मंत्रिमंडल विस्तार के बाद ही स्पष्ट होगी, लेकिन संकेत साफ हैं कि आगामी बदलाव में जातीय संतुलन का खास ख्याल रखते हुए सरकार में भी पीडीए की छाप दिखाने की कोशिश की जाएगी।
सरकार में शामिल होंगे भूपेंद्र चौधरी, मंत्रीमंडल में मिलेगी जगह
प्रदेश अध्यक्ष पद से मुक्त होने के बाद भूपेंद्र चौधरी का सरकार में समायोजन लगभग तय माना जा रहा है। उन्हें मंत्रिमंडल में कोई अहम जिम्मेदारी दी जा सकती है। इसके अलावा करीब आधा दर्जन नए चेहरों को मौका मिलने की संभावना जताई जा रही है। मंत्रियों के रिपोर्ट कार्ड की समीक्षा के आधार पर कुछ को संगठनात्मक जिम्मेदारियां भी सौंपी जा सकती हैं। उधर, संभावित विस्तार की आहट मिलते ही दावेदार विधायक दिल्ली और लखनऊ के बीच सक्रिय हो गए हैं।
मंत्रीमंडल में जातीय समीकरणों पर दिया जाएगा ध्यान
सूत्रों के मुताबिक जातीय समीकरण के साथ-साथ क्षेत्रीय संतुलन पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। पश्चिमी उत्तर प्रदेश, बुंदेलखंड और मध्य यूपी को मंत्रिमंडल में पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने पर विचार किया जा रहा है, ताकि सरकार का संदेश पूरे प्रदेश में समान रूप से पहुंचे।
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