यूपी के गोंडा में 21 करोड़ का घोटाला, कैशियर से लेकर बैंक मैनेजर तक हो गए मालामाल, पूरा मामला जान दंग रह जाएंगे आप!

Curated By: shivnowup | Hindi Now Uttar Pradesh • 14 Jan 2026, 11:48 am
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यूपी कोऑपरेटिव बैंक की गोंडा शाखा में 21.47 करोड़ रुपये के घोटाले का खुलासा हुआ है। स्पेशल ऑडिट रिपोर्ट के बाद तीन तत्कालीन शाखा प्रबंधक समेत 16 लोगों पर धोखाधड़ी और कूटरचना का मुकदमा दर्ज किया गया है।

उत्तर प्रदेश कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड की गोंडा शाखा में करोड़ों रुपये के बड़े बैंकिंग घोटाले का खुलासा हुआ है। स्पेशल ऑडिट और आंतरिक जांच की अंतिम रिपोर्ट के आधार पर सोमवार को नगर कोतवाली में 21 करोड़ 47 लाख 78 हजार रुपये के गबन के मामले में 16 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। आरोपियों में तीन तत्कालीन शाखा प्रबंधक, एक कैशियर और कई खाताधारक शामिल हैं। जांच में सामने आया है कि बैंक की नीतियों और आरबीआई के निर्देशों को पूरी तरह दरकिनार कर फर्जी दस्तावेजों के सहारे ऋण स्वीकृत किए गए और रकम का दुरुपयोग किया गया।


फर्जी दस्तावेजों से हुआ ऋण वितरण
स्पेशल ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार ऋण स्वीकृत करने से पहले न तो आवेदकों की पात्रता की जांच की गई और न ही आय प्रमाणपत्र, जमानत मूल्यांकन रिपोर्ट व अन्य जरूरी कागजातों का सत्यापन किया गया। कई मामलों में कूटरचित और फर्जी अभिलेखों के आधार पर बड़े-बड़े ऋण पास कर दिए गए। बैंक स्तर पर यह गड़बड़ी दिसंबर 2021 से जून 2025 के बीच अलग-अलग चरणों में होती रही। इस दौरान तैनात रहे शाखा प्रबंधकों और कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। जांच में यह भी खुलासा हुआ कि तत्कालीन शाखा प्रबंधकों ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए स्वयं और अपने परिजनों के खातों का इस्तेमाल किया। ऋण वितरण के नाम पर निकाली गई रकम को माता, पत्नी और पुत्र के खातों में ट्रांसफर किया गया।


9 लाख का लोन, खाते में दिखा 31 लाख बकाया
घोटाले की कड़ी में एक अलग मामला भी सामने आया है। बहराइच रोड निवासी शिवेंद्र द्विवेदी ने आरोप लगाया कि उन्होंने बैंक से केवल नौ लाख रुपये का होम लोन लिया था और नियमित किस्तें जमा कर रहे थे। बाद में जब उन्होंने अपने ऋण खाते का विवरण निकलवाया, तो उसमें 31 लाख रुपये का बकाया दिखाया गया। आरोप है कि तत्कालीन शाखा प्रबंधक पवन पाल सिंह और उनके सहयोगियों ने जानबूझकर कूटरचना कर अतिरिक्त राशि खाते में जोड़ दी। शिकायत करने पर पहले सुधार का आश्वासन दिया गया, लेकिन बाद में कथित तौर पर धमकियां दी गईं। पुलिस से कार्रवाई न होने पर पीड़ित ने न्यायालय का रुख किया, जिसके आदेश पर एफआईआर दर्ज की गई।


विभिन्न खातों में ट्रांसफर कर किया गबन
ऑडिट में यह भी सामने आया कि बैंक के पांच आंतरिक खातों से 46.13 लाख रुपये अवैध रूप से डेबिट कर अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किए गए। इसके अलावा खाताधारकों की 2,101.65 लाख रुपये की धनराशि विभिन्न बैंकिंग चैनलों के जरिए निकालकर गबन की गई। इस तरह कुल 21.47 करोड़ रुपये के घोटाले की पुष्टि हुई है। उत्तर प्रदेश स्टेट कोऑपरेटिव बैंक के सहायक महाप्रबंधक भुवनचंद्र सती की तहरीर पर नगर कोतवाली में तत्कालीन शाखा प्रबंधक पवन कुमार पाल, अजय कुमार, सुशील गौतम, कैशियर पवन कुमार समेत 16 लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचना, आपराधिक षड्यंत्र और विश्वासघात की धाराओं में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।


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