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Hindi Now Uttar Pradesh • 12 Aug 2025, 07:20 pm
फतेहपुर में मकबरे पर चढ़ने के मामले में समाजवादी पार्टी के नेता पप्पू चौहान को पार्टी से बाहर कर दिया गया है। सपा जिला अध्यक्ष सुरेंद्र प्रताप सिंह ने लेटर जारी कर उनके निष्कासन की घोषणा की, हालांकि पत्र में सीधे तौर पर मकबरे पर हुए बवाल का जिक्र नहीं है। पप्पू चौहान का नाम उन दस लोगों में शामिल है, जिन पर इस घटना के बाद नामजद केस दर्ज हुआ था।
पार्टी से निष्कासन के बाद पप्पू चौहान ने इस मामले में तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि सपा में सिर्फ मुसलमानों का दबदबा है और बाकी वर्गों को महत्व नहीं दिया जाता है। वह 2021 से पार्टी से जुड़े थे और हुसैनगंज विधानसभा क्षेत्र में पार्टी के लिए बहुत मेहनत की है, लेकिन उन्हें महसूस हुआ कि पार्टी केवल एक ही बिरादरी के लोगों के हित में काम कर रही है। अगर वे अपने धर्म या आस्था की बात करते हैं तो पार्टी नेताओं को यह बुरा लगता है और कार्रवाई की बात की जाती है।
पप्पू चौहान ने कहा कि मैंने सपा पर बहुत भरोसा किया था, लेकिन अब यह साफ हो गया है कि यहां अन्य वर्गों के लिए कोई जगह नहीं है। मेरी आस्था को ठेस पहुंची है, इसलिए मैं खुद स्वेच्छा से इस्तीफा दे रहा हूं। मैं सभी पदों से मुक्त होकर हिंदू धर्म और सनातन के लिए काम करूंगा। उन्होंने आगे कहा कि मेरा पूरा जीवन हिंदुत्व और सनातन संस्कृति के लिए समर्पित रहेगा। मैं अंतिम सांस तक हिंदू रहूंगा, जय श्री राम का नारा लगाऊंगा और अपने धर्म की रक्षा करूंगा।
इस घटनाक्रम ने फतेहपुर में पहले से चल रहे मकबरा-मंदिर विवाद को और गरमा दिया है। पप्पू चौहान के बयान से राजनीतिक माहौल और ज्यादा गर्म हो गया है।
क्या है पूरा मामला?
सोमवार सुबह करीब 10 बजे बजरंग दल व हिंदू महासभा समेत कई संगठनों के हजारों लोग ईदगाह स्थित मकबरा पहुंच गए। उन्होंने पुलिस ने बैरिकेडिंग तोड़ दी और लाठी-डंडे से लैस कार्यकर्ताओं ने मकबरे को मंदिर बताकर तोड़फोड़ शुरू कर दी। कुछ युवक छत पर चढ़कर भगवा झंडा लगाने लगे, जबकि हिंदू महासभा के नेता मनोज त्रिवेदी अंदर पहुंचकर पूजा करने लगे। इस पूरे मामले में सपा पप्पू चौहान का भी नाम सामने आया है। इसी मामले में उन पर कार्रवाई हुई है।
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