फतेहपुर में मंदिर या मस्जिद, क्या है पूरा विवाद?

Curated By: editor1 | Hindi Now Uttar Pradesh • 12 Aug 2025, 11:08 am
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उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जनपद में मंदिर-मस्जिद का विवाद आखिर क्या है। इसको लेकर दोनों पक्षों के क्या दावे हैं? आइये जानते हैं।

फतेहपुर में 11 अगस्त को भड़के विवाद की जड़ें करीब 13 साल पुरानी हैं। जिस मकबरे को लेकर यह बवाल हुआ, उस पर कई सालों से तनाव चल रहा था। सरकारी अभिलेखों में यह जमीन राष्ट्रीय संपत्ति मकबरा नगी के नाम दर्ज है, लेकिन हिंदू संगठनों का मानना है कि यह मकबरा नहीं, बल्कि ठाकुरजी का मंदिर है। उनका तर्क है कि अगर यह मकबरा होता तो इसकी दीवारों पर त्रिशूल और हिंदू प्रतीक क्यों बने होते?


हिंदू पक्ष का दावा, जमीन हमारी, कागजों में हेरफेर

बजरंग दल के जिला संयोजक धर्मेंद्र सिंह का दावा है कि करीब 20 एकड़ की यह जमीन सदियों से हिंदुओं की रही है। मुगलकाल में शासकों ने कहीं भी अपने निशान लगाकर कब्जा कर लिया और उसे अपना बता दिया। उन्होंने बताया कि 11 दिसंबर 2012 तक यह जमीन मकबरे के नाम पर दर्ज नहीं थी, लेकिन सपा सरकार के समय राजस्व अभिलेखों में बदलाव कर इसे मकबरे के नाम कर दिया गया। धर्मेंद्र सिंह का कहना है कि उनके पास इस कथित हेरफेर के प्रमाण मौजूद हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अब वे अपनी जमीन वापस लेकर रहेंगे। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून को हाथ में नहीं लेंगे, लेकिन किसी दबाव में झुकेंगे भी नहीं। उन्होंने कहा कि यह मकबरा नहीं, ठाकुरजी का मंदिर है और यह करोड़ों हिंदुओं का आस्था का स्थल है।


मुतवल्ली का दावा 500 साल पहले अकबर के पोते ने बनवाया

दूसरी ओर मकबरे के केयरटेकर (मुतवल्ली) मोहम्मद नफीश का दावा है कि यह मकबरा 500 साल पहले अकबर के पोते ने बनवाया था। राजस्व रिकॉर्ड में 753 नंबर खतौनी के तहत यह जमीन 76,901.4 वर्गफुट क्षेत्रफल में दर्ज है और ईदगाह परिसर का हिस्सा है। नफीश ने बताया कि यहां अबू मोहम्मद, अब्दुल समद की मजार है और लोग वर्षों से यहां जियारत करते हैं, मन्नतें मांगते हैं। उन्होंने कहा कि वे पिछले 20 साल से इसकी देखरेख कर रहे हैं। इससे पहले करीब 30 साल तक अनीस भाई इसकी देखरेख करते थे और उनके निधन के बाद यह जिम्मेदारी उन्हें सौंपी गई। मुतवल्ली के मुताबिक ईदगाह परिसर में यह मकबरा लंबे समय से मौजूद है और हर साल ईद व बकरीद पर नमाज अदा की जाती है। उन्होंने हिंदू संगठनों के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि सरकार जिसके हाथ में है, वो कुछ भी कर सकती है, लेकिन सच्चाई यह है कि यहां केवल मजार है, मंदिर नहीं।


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